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व्यक्ति को परमात्मा का चिंतन व अनुसंधान करना चाहिए
- रतलाम व्यक्ति को परमात्मा का चिंतन व अनुसंधान करन चाहिये अगर यह नहीं कर सकता है तो सच्चे मन से नारायण नारायण जपना चाहिये अगर व्यक्ति ऐसा करता है तो उसका उद्धार हो जाएगा यह बात श्री स्वामी स्वरूपानंद महाराज के द्वितीय निर्वाण दिवस अवसर पर श्री अखंड ज्ञान आश्रम सेलाना रोड पर आयोजित श्रीमद भागवत ज्ञान यज्ञ के अंतिम दिवस पर व्यास पीठ से स्वामी देवस्वरूपानंद महाराज ने उपस्थित श्रद्धालुओं से कहीं उन्होंने कहा की जो व्यक्ति सतसंग में आया है उन्होंने यह स्वीकार कर लिया है की सद्गुरू ही नारायण का स्वरूप है यह बात आपके जीवन में सद्गुरू के अलावा कोई और नहीं उतार सकता है उन्होंने कहा की व्यक्ति को मनोवृतियों को समेटना चाहिये तथा परमात्मा में लगाना चाहीई परमात्मा ही चेतन स्वरूप है। हर राजा के लिए उसकी प्रजा पुत्र के समन होती है भागवत कथा का उद्देश्य संसार से विकृतियां हटाना होता है। उन्होंने कहा की जहां रजो गुण व तमो गुण होगा वहॉ पर परमात्मा का चिंतन नहीं होगा जहां सतो गुण होगा तथा रजो व तमो गुण नहीं होगा केवल वहीं पर परमात्मा का चिंतन होगा । भगवत कथा के श्रवण से व्यक्ति के अंतकरण में रजोगुण तथा तमो गुण नहीं जम पाते हैं। दुष्टो के विनाश से प्रजा प्रसन्न होती है संसार में दुष्टओ का नाश होना चाहिये जिससे प्रजा प्रसन्न व सुरक्षित रहे। प्रसिद्ध भजन गायक लोकेश पुरोहित, मनोहर माहेश्वरी व राजेंद्र व्यास में मेरे सिर पर रख दो गुरुवर अपने दोनो हाथ ,देना हो तो दीजिए जन्म-जन्म का साथ प्रस्तुत किया जिस पर श्रद्धालु भाव विभोर हो गए कथा के विश्राम पर आरती कर प्रसादी वितारित की गई उक्त जानकारी देते हुए राकेश पोरवाल ने बताया की कथा जजमान दिनेश राय, पद्मा राय, राजेंद्र पुरोहित सहित नागरिक मौजूद थे अंत में प्रसादी वितारित की गई।
