नियमो की बात करने वाली सीएमओ की बड़ी लापरवाही हादसे के बाद हुई उजागर……..!
ट्रांसफर के बाद भी मोह नहीं छुटा........
सुरेश मुलेवा झाबुआ पेटलावद परिषद में पदस्थ्य होने के बाद लगातार विवादों में रही सीएमओ
नियमो की बात करने वाली सीएमओ की बड़ी लापरवाही हादसे के बाद हुई उजागर……….
ट्रांसफर के बाद भी नही छुटा पेटलावद का मोह, लिया स्टे….!!
पेटलावद नगर परिषद में जब से सीएमओ के रूप में आशा भंडारी ने पदभार ग्रहण किया है, तब से मानो हर एक नए विवाद के साथ आशा भंडारी का नाम जुड़ते हुए नजर आया है। पूर्व में भी अध्य्क्ष सहित कई पार्षदों ने सीएमओ का विरोध किया था और जनपद कार्यालय पहुच कर वहां मौजूद एसडीएम से सामूहिक शिकायत की थी। किंतु बावजूद उसके फिर भी स्थिति में सुधार नहीं आया। सूत्रों के अनुसार नगर परिषद में अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और समस्त पार्षद सिर्फ नाम मात्र के ही रह चुके हैं। सीएमओ उन्हें अपने तरीकों से चला रही है। कहीं ना कहीं जनप्रतिनिधियों और सीएमओ का आपसी तालमेल न बैठना और सीएमओ के एटीट्यूड के चलते नगर के विकास पर ग्रहण लग चुका है। नगर की जनता वार्डों में पार्षदों को कोसते हुए आसानी से देखी जा सकती है। जनता का विरोध पार्षदों को झेलना पड़ रहा है क्योंकि चुनाव के समय प्रत्याशियों ने चुनाव जीतने के लिए जो वादे और दावे किए थे वह सभी खोखले साबित हो गए। या यूं कहें की सीएमओ के आने के बाद विकास कार्यों पर सीधे तौर पर ग्रहण लगा है और लगातार अपने नियमों की बात करने वाली सीएमओ की बड़ी लापरवाही तो हादसे ने उजागर कर ही दी है। बताया जाता है कि परिषद में छोटी बड़ी खरीदी भी सीएमओ की निगरानी में होती है और स्थानीय दुकानदारों और व्यापारियों को लाभ न देते हुए अन्य शहरों और जिलों से सामग्री खरीदी की जा रही है। पेटलावद परिषद की स्थिति यह हो चुकी है कि पार्षद नाम मात्र परिषद में सिर्फ घूमने जाते हैं। और घूम कर वापस लौट आते हैं। क्योंकि ना समस्या सुनी जाती है, ना समस्या पर अमल होता है, ना ही समस्या दूर होती है। लेकिन बड़ा सवाल यह भी है कि इतनी प्रताड़ना और इतनी बेज्जती के बाद भी जनप्रतिनिधि क्यों सीएमओ के खिलाफ आवाज नहीं उठा पा रहे हैं। अंदरखाने की खबर यह भी है कि सीएमओ की प्रताड़ना से अधीनस्थ कर्मचारी भी परेशान है। और सीएमओ के खिलाफ कभी भी विरोध के स्वर तेजी से उठ सकते हैं। क्योंकि पेटलावद हादसे में खुद पर तलवार लटकना देख सीएमओ ने अपने अधीनस्थ कर्मचारियों को ही सूली पर चढ़ाने का ऐलान कर ही दिया है….!! गोरतलब है कि पूर्व में सीएमओ का ट्रांसफर हो गया था किंतु सीएमओ ने न्यायालय की शरण लेकर स्टे ले लिया था। ट्रांसफर होने के बाद भी पेटलावद मोह नही छुटा।