हम धर्म से जुड़े हैं जड़ से जुड़े हैं
महामंडलेश्वर स्वामी चिदम्बरानंद सरस्वती महाराज ने उपस्थित श्रद्धालुओं से कहीं
रतलाम संसार का मूल ही धर्म है जड़ से जुड़ने वाला कभी सूखता नहीं है सनातन धर्म पर अनेक आक्रमण हुऐ उसके हजारों वर्षों के बाद भी आज सनातन सीना तानकर खड़ा है क्योंकि हम धर्म से जुड़े हैं जड़ से जुड़े हैं यह बात श्रीकालिका माता सत्संग हॉल में उन्होंने कहा कि हजारों प्रहार के बाद भी गौरव, स्वाभिमान, धर्म, समर्पण के भाव से आज भी सुरक्षित है विपरीत परिस्थितियों में भी हम सफल हैं उन्होंने कहा कि धर्म को हमारे घर में बढ़ाने की स्वयं की जिम्मेदारी है धर्म भगवान का स्वरूप है उसे कोई नष्ट नहीं कर सकता घर में धर्म को बचाने का प्रयास हमें करना है धर्म संस्कृति और आचरण को परिवार में लाइए धर्म का आचरण करने पर ही सुख प्राप्त होगा परिवार की संस्कृति केवल भारतीय संस्कृति में है इस संस्कृति को सुरक्षित रखने के लिए धर्म व संस्कृति से जुड़े रहना चाहिए। एकाकी जीवन को नहीं हमने परिवार संस्कृति को महत्व दिया है परिवार को बचाने में कथा की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है कथा परिवार समाज को आपस में जोड़े रखती है स्वामी जी ने कहा कि रतलाम में उन्हें उनका दूसरा घर लगता है वह रतलाम पिछले 12 वर्षों से लगातार आ रहे हैं यह मेरा घर आंगन है उन्होंने कहा कि नारी ही परिवार की धुरी होती है देश को बचाने की जिम्मेदारी संत लेते हैं नारी, परिवार और धर्म संस्कृति को बचाने की जिम्मेदारी नागरिको की है। उन्होंने कहा कि जीवन में जब भी कोई दुख आता है तो गुरु की शरण में जाना चाहिए हमारी विडम्बना है कि हम गुरु से सुख छुपाते हैं तथा उन्हें केवल दुख बताते हैं ऐसा नहीं होना चाहिए गुरु को सुख और दुख दोनों बताना चाहिए संसार को यदि आप दुख सुनाओगे तो वह आपका मजाक बनाएगा और यदि गुरु को आप दुख बताएंगे तो गुरु उन्हें जड़ से दूर कर देंगे गुरु के प्रति श्रद्धा विश्वास का भाव होना चाहिए । बुक तो जानकारी देते हुए राकेश पोरवाल ने बताया कि इस अवसर पर स्वामी जी का श्री कालिका माता सेवा मंडल ट्रस्ट के मोहनलाल भट्ट ,विश्वदीप टंडन ,दीपक पुरोहित ,ब्रजेश सक्सेना, निलेश सोनी,उमंग गोयल आदि ने स्वागत व सम्मान किया कार्यक्रम का संचालन कैलाश व्यास ने किया l
