रतलाम इंदौर के बीजेपी विधायक गोलू शुक्ला के गुंडे बेटे ने देवास टेकरी स्थित माँ चामुंडा देवी के मंदिर में सत्ता के अहंकार का नंगा नाच दिखाया है। पूरी दादागिरी और रौब के साथ लालबत्ती की गाड़ियों से देवास मंदिर पहुंचने वाले इंदौर विधायक गोलू शुक्ला के बेटे का माँ चामुंडा टेकरी पर किया यह घिनौना कृत्य न केवल सत्ता के दुरुपयोग का वीभत्स चेहरा सामने लाता है, बल्कि यह भी सवाल खड़ा करता है कि क्या बीजेपी नेताओं के परिवार सत्ता के नशे में इतने अंधे हो गए हैं कि उन्हें धर्म, संस्कृति, आस्था, कानून और नैतिकता की कोई परवाह ही नहीं है देवास की चामुंडा माता टेकरी पर बीजेपी विधायक गोलू शुक्ला के बेटे ने जो हरकत की, वह किसी भी सभ्य समाज के लिए शर्मनाक है। रात 12:40 बजे मंदिर में पुजारी को पीटने की खबर ने पूरे शहर को हिलाकर रख दिया। पुजारी की गलती बस इतनी थी कि उन्होंने विधायक के बेटे से मंदिर के नियमों का पालन करने को कहा। जवाब में विधायक का बेटा अपने गुंडों के साथ पुजारी पर टूट पड़ा। यह घटना सिर्फ एक व्यक्ति पर हमला नहीं, बल्कि हमारी धार्मिक और सामाजिक मर्यादाओं पर हमला है।क्या सत्ता का मतलब यह है कि आप किसी की भी आस्था और गरिमा को रौंद सकते हैं? क्या विधायक का बेटा होने का मतलब यह है कि आप कानून से ऊपर हैं? यह घटना दिखाती है कि कैसे सत्ता का नशा बीजेपी नेताओं के परिवारों को गलत रास्ते पर ले जा रहा है। विधायक का बेटा होने के नाते उसे यह हक कहां से मिला कि वह मंदिर जैसे पवित्र स्थान पर गुंडागर्दी करे और पुजारी को मारपीट का शिकार बनाए? इस घटना में पुलिस की भूमिका भी संदेह के दायरे में है। खबरों के मुताबिक, पुलिस ने विधायक के बेटे के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। यह सवाल उठना लाजमी है कि क्या सत्ता के दबाव में पुलिस अपना कर्तव्य भूल रही है? अगर एक आम नागरिक ऐसी हरकत करता, तो क्या पुलिस इतनी नरमी बरतती? यह स्पष्ट है कि सत्ता का रसूख कानून को भी अपने अधीन कर लेता है, और यही वजह है कि आम जनता का भरोसा व्यवस्था से उठता जा रहा है यह घटना सिर्फ देवी माँ पर हमला या एक पुजारी की पिटाई तक सीमित नहीं है। यह बीजेपी के संरक्षण में बढ़ते नैतिक पतन और सत्ता के दुरुपयोग की एक खतरनाक मिसाल है। जब सत्ता में बैठे लोगों के परिवार ही इस तरह की हरकतें करेंगे, तो आम जनता से क्या उम्मीद की जा सकती है? यह घटना युवाओं को गलत संदेश देती है कि अगर आपके पास सत्ता है, तो आप कुछ भी कर सकते हैं। बीजेपी, जो हिन्दूओं का वोट लूटने के लिए खुद को संस्कृति और धर्म की ठेकेदार बताती फिरती है, इस मामले में चुप क्यों है? क्या पार्टी को अपने विधायक और उनके परिवार की करतूतों पर कोई शर्म नहीं है? अगर बीजेपी वाकई में धर्म और नैतिकता की बात करती है, तो उसे इस मामले में सख्त कार्रवाई करनी चाहिए। विधायक गोलू शुक्ला को अपने बेटे की हरकतों की जिम्मेदारी लेनी चाहिए और पार्टी को गोलू शुक्ला जैसे विधायकों को बाहर का रास्ता दिखाना चाहिए।इस घटना पर सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो यह एक गलत संदेश जाएगा। सत्ता का मतलब सेवा है, दादागिरी नहीं। बीजेपी और पुलिस को इस मामले में तुरंत कदम उठाना चाहिए, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि कानून से कोई बड़ा नहीं है—चाहे वह किसी गुंडे विधायक का बेटा ही क्यों न हो।
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