चमत्कार तो व्यक्ति की भावना में होता है

रतलाम श्री स्वामी ज्ञानानंद जी के 34 वे निर्वाण महोत्सव के अवसर पर चित्रकूट पीठाधीश्वर अनंत श्री विभूषित डॉ स्वामी दिव्यानंद महाराज की अध्यक्षता में सैलाना बस स्टैंड क्षेत्र स्थित श्री अखंड ज्ञान आश्रम पर संगीत मय श्रीमद् भागवत ज्ञान यज्ञ अमृत महोत्सव के दौरान कथा व्यास से परम पूज्य पंडित मोहनलाल दुबे ने उपस्थित श्रद्धालुओं से कहा कि जिस व्यक्ति अंतिम समय में भगवान का नाम स्मृति/ मनन में आ जाएगा उसका कल्याण हो जाता है अंतिम समय से मतलब व्यक्ति जब तक शारीरिक रूप से स्वस्थ व समझदार है उसका शरीर कार्य कर रहा हो अंत का मतलब मृत्यु से नहीं है इसलिए व्यक्ति को समय रहते को कुकर्मों का प्रायश्चित कर लेना चाहिए तो उसका कल्याण निश्चित है। उन्होंने कहा कि जिस व्यक्ति के मन में कोई भय रहता है तो उस व्यक्ति का संसार के किसी कार्य में मन नहीं लगता है व्यक्ति को अपने मन से विषय वासना को निकालना चाहिए तो ही व्यक्ति की गति मुक्ति संभव है, उन्होंने कहा कि व्यक्ति को मन को भगवान में लगाना चाहिए तथा हृदय में भगवान का ध्यान करना चाहिए । व्यक्ति को स्थिति के अनुसार अपने को ढाल लेना चाहिए तथा केवल अपनी ही बात जबरदस्ती नहीं मनवाना चाहिए तो ही व्यक्ति सफल हो पता है उन्होंने कहा कि चमत्कार तो व्यक्ति की भावना में होता हैकेवल मूर्ति पूजा करने से भगवान की प्राप्ति नहीं हो जाती है यदि व्यक्ति के मन में भावना हो तो भगवान अवश्य मिल जाते हैं। कथा प्रारंभ होने से पहले कथा परीक्षित कैलाश जाट कलाबाई जाट एवं जाट परिवार व नागरिको ने पोथी पूजन किया । कथा के अंत में आरती कर प्रसादी वितरित की गई। आश्रम व्यवस्थापक स्वामी देव स्वरूपानंद महाराज ने बताया कि कथा प्रतिदिन दोपहर 1 बजे से कथा प्रारंभ होगी इस अवसर पर अवधेशानंद महाराज ओंकारेश्वर, अच्युतानंद महाराज, हरिहरानंद महाराज हरिद्वार, नील भारती महाराज धराड, वासुदेवानंद महाराज उज्जैन, रतनलाल जोहार, कमल बाबूजी, राकेश दीक्षित, जगदीश शर्मा, मनोहर सिंह चौहान, मनोज बोराणा, राजेंद्र राठौड़ ,राजेन्द्र पुरोहित , सहित नागरिक उपस्थित थे ।
