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यही गलती महाभारत काल में पांडवों ने भी की

रतलाम यदि भगवान ने व्यक्ति को धन संपदा दी है तो व्यक्ति को उसको धार्मिक कार्यों में खर्च करना चाहिए इससे व्यक्ति को प्राप्त धन का सदुपयोग होता है व्यक्ति को जीवन में किसी का भी धन जबरदस्ती नहीं लेना चाहिए किसी का जबरदस्ती लिया गया धन महापाप है यदि किसी ब्राह्मण ने दान में गौ माता को प्राप्त किया है और उसके बाद यदि वह गौ माता को विक्रय कर देता है तो उसे महापाप का भागी बनना पड़ता है यह बात स्वामी श्री ज्ञानानंद जी के 34 वे निर्वाण महोत्सव पर सैलाना बस स्टैंड क्षेत्र स्थित श्री अखंड ज्ञान आश्रम पर आयोजित श्रीमद् भागवत ज्ञान यज्ञ अमृत महोत्सव विश्राम अवसर पर व्यास पीठ से पंडित मोहनलाल दुबे ने उपस्थित श्रद्धालुओं से कहीं उन्होंने कहा कि जिस व्यक्ति को एक बार द्यूत क्रीड़ा करने की आदत पड़ जाती है तो वह छुटती नहीं है और यही गलती महाभारत काल में पांडवों ने की थी तथा उन्होंने कौरवों के साथ द्यूत क्रीड़ा की थी तथा उसमे हारने के बाद उसके दुष्परिणाम महाभारत युद्ध के रूप में हुए थे इसलिए कहा गया है कि कोई भी निर्णय लेने से पहले उसे पर विचार कर लेना चाहिए कि इसका परिणाम क्या होगा ,उन्होंने कहा कि भगवान से किसी की भी दशा छुपी हुई नहीं होती है भगवान अंतर्यामी है जब भगवान श्री कृष्णा द्वारिका में बाल सखा सुदामा से मिलने पहुंचे तो उन्हें मित्र सुदामा की दशा के बारे में सब कुछ पता था इसलिए उन्होंने सुदामा को सब कुछ दे दिया। उन्होंने कहा कि ज्ञान की में पराकाष्ठा में व्यक्ति में भक्ति आ जाती है। इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री व विधायक चैतन्य कश्यप संतों का आशीर्वाद लेने अखंड ज्ञान आश्रम पहुंचे तथा उन्होंने कहा कि जीवन में भौतिक उन्नति के साथ आध्यात्मिक उन्नति का होना आवश्यक है और यह उन्नति संतो के प्रवचन एवं भागवत कथा द्वारा ही संभव है। कथा के अंत में मुख्य जजमान कैलाश जाट , कलाबाई जाट व नागरिकों ने पोथी पूजन किया तथा आरती कर प्रसादी वितरित की गई उक्त जानकारी देते हुए राकेश पोरवाल ने बताया कि इस दौरान आश्रम व्यवस्थापक स्वामी देव स्वरूपानंद, रमेशचंद्र जाट, महेंद्र सिंह सिसोदिया, अशोक तुवेरिया, छोगालाल जाट ,नारायण जाट, रतनलाल जाट, राधेश्याम जोशी, शांतिलाल जाट, राजेंद्र पुरोहित सहित सैकड़ो नागरिक मौजूद थे।

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