
रतलाम श्री गुरु तेगबहादुर शैक्षणिक विकास समिति द्वारा नगर में संचालित तीनों विद्यालयों के शिक्षकों व कर्मचारियों का सम्मान समारोह अरविंद मार्ग स्थित खालसा सभागृह में म. प्र.लोक सेवा आयोग अध्यक्ष श्री राजेश लाल मेहरा व श्रीमती माधुरी मेहरा के आतिथ्य में संपन्न हुआ । समिति अध्यक्ष गुरनाम सिंह डंग, सचिव अजीत छाबड़ा व प्रवक्ता सुरेंद्र सिंह भामरा ने बताया कि कार्यक्रम के प्रारंभ में अतिथी राजेश लाल मेहरा, गुरनाम सिंह डंग ने मां सरस्वती व श्री गुरु तेग बहादुर जी के चित्र पर माल्यार्पण कर दीप प्रज्जवलन किया। प्रीत कौर भामरा व साथियों ने शबद व मां सरस्वती की आराधना प्रस्तुत की । अतिथियों का स्वागत समिति अध्यक्ष सरदार गुरनाम सिंह, उपाध्यक्ष हरजीत चावला, सचिव अजीत छाबड़ा, कोषाध्यक्ष देवेंद्र सिंह वाधवा, सहसचिव हरजीत सलूजा, प्रवक्ता सुरेंद्र सिंह भामरा , समिति सदस्य सतपाल सिंह डंग, धर्मेंद्र गुरुदत्ता, गगनदीप सिंह डंग ,बंटी खालसा एकेडमी प्राचार्य डॉ रेखा शास्त्री, हेड मिस्ट्रेस कविता कुंवर, पब्लिक स्कूल प्रधान अध्यापिका सरला माहेश्वरी, हेडमिस्ट्रेस मनीषा ठक्कर,बलजीत सिंह, अमरपाल सिंह वाधवा, गुरमीत सिंह गुरदत्ता,गुरमीत सिंह गांधी,जगमीत सिंह, कुलवंत सिंह सग्गू, सरबजीत सिंह सलूजा आदि ने किया । कार्यक्रम को संबोधित करते हुए समिति अध्यक्ष सरदार गुरनाम सिंह डंग ने कहा कि शिक्षक बच्चों को केवल किताबी ज्ञान नहीं देता है वह बच्चों के व्यक्तित्व को निखारता है चरित्र को गढ़ता है और एक चरित्रवान व्यक्ति देश का निर्माण करता है उन्होंने कहा कि केवल शिक्षक ही ऐसा व्यक्ति है जो अपने शिष्यों को आगे बढ़ते हुए देख कर प्रसन्न होता है शिक्षक वह शख्स है जो हमेशा नवनिर्माण करता है यदि देश में डॉक्टर या इंजीनियर गलत बन जाए तो कुछ ही नुकसान होता है किंतु यदि कोई शिक्षक गलत बन जाए तो पूरी पीढ़ी नष्ट हो जाती है वहीं एक अच्छा शिक्षक नवनिर्माण कर सृजन करता है। कार्यक्रम के अतिथि श्री राजेश लाल मेहरा ने कहा कि ज्ञान के समान पवित्र करने वाला दूसरा कोई साधन नहीं है । मनुष्य जीवन की सार्थकता तभी है जब आप पवित्र बन जाते हैं शेष कार्य प्रकृति अपने आप आपके माध्यम से करवाती है उन्होंने कहा की गुरबाणी , नदियां, तीर्थ , सूर्य के दर्शन, महापुरुषों व गुरुजनों की वाणी प्राणी मात्र को पवित्र करती है । उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि व्यक्ति की जिंदगी पहाड़ पर ऊपर की और चढ़ते जैसी होना चाहिए और जब वापस नीचे उतरे तो नदी की तरह उतरे जो सबको पवित्र कर शुद्ध जल बॉटते जाना जैसी होना चाहिए कहने का तात्पर्य है व्यक्ति को मेहनत और पुरुषार्थ करके शीर्ष पर पहुंचना चाहिए तथा शिखर से लौटते समय नदी बन जाना चाहिए क्योंकि नदी सिर्फ देना जानती है, उन्होंने कहा कि वृक्ष और शिक्षक कभी किसी से भेदभाव नहीं करते हैं तथा हमेशा कुछ ना कुछ हमें देते ही हैं, उन्होंने कहा कि एक अच्छा शिक्षक वह होता है जो हमेशा विद्यार्थी के हित में सोचता है वह वैसा करता है यदि शिक्षक का हृदय विद्यार्थियों के लिए जितना अधिक अच्छा सोचेगा तो वे उतने ही अच्छे श्रेष्ठ शिक्षक बन जाएंगे। इस अवसर पर समिति ने एकेडमी प्राचार्य डॉ रेखा शास्त्री, प्रधानाध्यापिका कविता कुंवर, पब्लिक स्कूल प्रधानअध्यापीका सरला माहेश्वरी, मनीषा ठक्कर, सुनंदा पंडित, नीता वच्छानि, गायत्री वोहरा, शुभम गेलड़ा, बस इंचार्ज सुरेश जाजोरिया, राहुल विजय, पत्रकार राकेश पोरवाल, महेंद्र लोट, श्री चौहान, मकसूद खान, शशि कुमार सिंह, कमलेश नरवरिया, कविता चावरे सहित 300 से अधिक शिक्षकों व कर्मचारियों को सम्मानित करने के साथ साथ परंपरानुसार जनचेतना मूक बधिर विद्यालय के दो शिक्षकों को भी उपहार दे सम्मानित किया गया। शिक्षकों ने विभिन्न रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम भी प्रस्तुत किये। समिति ने श्री राजेश लाल मेहरा व श्रीमती माधुरी मेहरा को शॉल श्रीफल व प्रतीक चिन्ह देकर सम्मानित किया गया कार्यक्रम का संचालन सीमा भाटी ने व आभार डॉ रेखा शास्त्री ने माना ।




